सोने की खान से प्रेम
This post has been sourced from my old blog.
Original Blog Date: February 6, 2021
क्या काव्य में छंद की अनुप्थिति से वो काव्य नहीं रह जाता? क्या गीत में ताल के अभाव से वह गीत नहीं रह जाता?
जो पूर्ण है, उसकी पूर्ति के लिए भी कहीं तो कोई गुंजाइश है। क्योंकि इस ब्रह्माण्ड में, कोई अंत नहीं है, हर चीज़ किसी और बड़े प्रतिभास की ओर इशारा करती है।
हम एक मानव है, भूल चूक कमियों ग्लानियों भय और ना जाने कितने ही अन्य दुर्गुणों की एक असीम खान। ये स्वयं को नीचा दिखाने के लिए कदापि नहीं लिखा गया है। यूं तो सोना भी कई बार खान - ए- गुबार में प्राप्त होता है।
सोचने की बात ये है, कि इस सोने की खान का अन्वेषण करने का गुर क्या आपमें है? क्या उतना गुर पर्याप्त है? क्या कोई आपकी सहायता कर सकता है? किस एक भाव से आप उस खान में सोने के सबसे निकट पहुंच जाते हैं?
सबकी बात मै नहीं कर सकती। अपनी कर सकती हूं। बालपन से ही हमें कभी भी स्वीकृति का अनुभव नहीं हुआ। कोई ऐसा व्यक्ति प्राप्त नहीं हुआ जो पूरी खान से प्रेम करे, ना केवल उस सोने से, जिसका ज्ञान तो उसे है, पर उस तक पहुंचने का मार्ग नहीं जानता। कोई ऐसा नहीं मिला जो सोने की चमक के धुंधलाने पर उसके कारण पर हमें मनन करने का प्रोत्साहन दे ना कि हमें ही उसका दोषी ठहरा कर स्वयं ठगा हुआ महसूस करे।
हम जानते थे, और अब मान भी गए हैं कि हम अभी जो हैं, उससे कई गुना बेहतर हो सकते है। और हम जानते थे, कि आदिशक्ति में शक्ति का तात्पर्य प्रेम मात्र से है।
हमें प्रेम प्राप्त हुआ। और हम संतुष्ट हैं। संतुष्ट हैं कि किसी ने इस खान में सोने से लेकर धूल के एक एक कण को स्वीकार किया है। संतुष्ट हैं कि किसी ने हमारे काव्य को छंद देने की इच्छा प्रकट की है। संतुष्ट हैं कि कोई ५ साल से हमारे बड़ा - खयाल के संग विलंबित एक ताल में संगत दे रहा है। शिकायत नहीं कि वो उस खान के सामने ही कभी कभी बाहर के बागों तालाबों में विचरण करने को उत्सुक रहता है, शिकायत नहीं कि वो कभी कभी छंद में इतना उलझ जाता है कि हर शब्द में सन्नाटा सुनाई देता है, शिकायत नहीं कि वो खयाल के अंतिम चरण में सो जाता है। क्योंकि ये उसका दायित्व नहीं, उसका बंधन नहीं। ये खान उसका घर है, कारागार नहीं। इस काव्य का वो संपादक है, लेखक नहीं। और यह खयाल उसके प्रेम का साधन है, साध्य नहीं।
हम दो है, पूर्ण है, एक दूसरे को सम्पूर्ण की ओर लिए जा रहे हैं, अतः, एक बड़े परमसत्य का हिस्सा हैं जहां हम एक इकाई है।
सप्रेम
आदिशक्ति
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