आँखें झुका कर
This post is sourced frmo my old blog.
Original Blog Date: January 4, 2021
जब सब टूट के बिखर जाए,
तुम आँखें झुका कर मुस्कुरा देना
जब सागर ह्रदय का छलक जाए
तुम आँखें झुका कर मुस्कुरा देना
जब घर शीशे क तुम्हारा, तुम्हारे सर पर ही गिर जाए
तुम आँखें झुका कर मुस्कुरा देना
जब तुम्हारा दुपट्टा ही फांसी बन जाए
तुम आँखें झुका कर मुस्कुरा देना
जब एक पल तुम्हारी सदियां निगल जाए
तुम आँखें झुका कर मुस्कुरा देना
जब वो लेने लगे परीक्षाएं अब तब, जब तब, कब कब
तुम आँखें झुका कर मुस्कुरा देना
जब हर आवाज़ तुम्हे ताने दे
तुम आँखें झुका कर मुस्कुरा देना
जब गलती तुम्हारी न होकर भी तुम्हारी हो जाए
तुम आँखें झुका कर मुस्कुरा देना
जब लड़ने की शक्तियां ढून्ढ कर भी न जुटा पाओ
बैठ जाना
लेट जाना....
तुम आँखें झुका कर ...फिर मत उठना।
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