कौन हो तुम?
This post has been sourced from my old blog.
Original Blog Date: April 28, 2018
मन के सूखे कुएँ के तल पर बंजर पड़ी खुशी?
या आंखों की नमी पर चाँदनी बिखेरती हंसी?
कौन हो तुम?
मेरे वैराग का गर्व?
या मेरे खालीपन का पर्व?
कौन हो तुम?
मेरी मासूमियत के वजूद की आख़िरी निशानी?
या मेरी वास्तविकता से भेंट की पहली कहानी?
कौन हो तुम?
मेरी छायाभरी यादों का नज़राना?
या मेरे धूप सेंकते सपनों का खज़ाना?
कौन हो तुम?
मेरा घर? मेरा आंगन? मेरा साहिल?
या मेरी खोज? मेरा सफ़र? मेरी मंज़िल?
कौन हो तुम?
मेरे लड़खड़ाते लेखन का मजबूत सहारा?
या मेरे दिलेर संगीत का मौन हत्यारा?
कौन हो तुम?
कैसे हो तुम?
जैसे भी हो, मेरे हो तुम!
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